निर्भया गैंगरेप: विनय शर्मा, मुकेश सिंह की क्यूरेटिव पिटिशन हुई ख़ारिज
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को विनय कुमार शर्मा और मुकेश सिंह की क्यूरेटिव पिटिशन को खारिज कर दिया है.
इन दोनों पर साल 2012 की 16 दिसंबर को एक चलती बस में एक युवती के साथ बलात्कार करने का आरोप है.
मामले पर सुनवाई चेंबर के भीतर हुई थी. जिसके बाद जस्टिस एन वी रमन्ना ने नेतृत्व वाली पांच जजों की बेंच ने विनय कुमार शर्मा और मुकेश सिंह की क्यूरेटिव पिटिशन को ख़ारिज कर दिया.
लाइव लॉ के मुताबिक, पांच जजों की बेंच में जस्टिस एन वी रमन्ना के अलावा जस्टिस अरुण मिश्रा, आर.एफ. नरीमन, आर बानुमती और अशोक भूषण भी थे.
इसके बाद निर्भया की मां आशा देवी ने कहा है, "सात साल से वो न्याय के लिए संघर्ष कर रही थीं. उनके लिए फांसी का दिन 22 जनवरी बड़ा दिन होगा."
निर्भया गैंगरेप मामले के चारों दोषियों के ख़िलाफ़ दिल्ली की एक कोर्ट ने सात जनवरी 2020 को डेथ वॉरन्ट जारी किया था. इसके बाद पटियाला हाउस कोर्ट ने फांसी के लिए 22 जनवरी, 2020 की तारीख़ सुबह सात बजे का समय तय किया है.
लेकिन फ़ैसले के बाद ही दोषी विनय के वकील एपी सिंह ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वे क्यूरेटिव पिटिशन दायर करेंगे.
विनय कुमार ने सबसे पहले आठ जनवरी 2020 को क्यूरेटिव पिटिशन दायर की. हालांकि बाद में दोषी क़रार दिए गए चार में से एक मुकेश ने भी क्यूरेटिव पिटिशन दाख़िल कर दी थी.
16 दिसंबर 2012: 23 वर्षीय फ़िज़ियोथेरेपी छात्रा के साथ चलती बस में छह लोगों ने गैंगरेप किया. छात्रा के पुरुष मित्र को बुरी तरह पीटा गया और दोनों को सड़क किनारे फेंक दिया गया.
17 दिसंबर 2012: मुख्य अभियुक्त और बस ड्राइवर राम सिंह को गिरफ़्तार कर लिया गया. अगले कुछ दिनों में उनके भाई मुकेश सिंह, जिम इंस्ट्रक्टर विनय शर्मा, फल बेचने वाले पवन गुप्ता, बस के हेल्पर अक्षय कुमार सिंह और एक 17 वर्षीय नाबालिग़ को गिरफ़्तार किया गया.
29 दिसंबर 2012: सिंगापुर के एक अस्पताल में पीड़िता की मौत. शव को वापस दिल्ली लाया गया.
11 मार्च 2013: अभियुक्त राम सिंह की तिहाड़ जेल में संदिग्ध हालत में मौत. पुलिस का कहना है कि उसने आत्महत्या की, लेकिन बचाव पक्ष के वकील और परिजनों ने हत्या के आरोप लगाए थे.
31 अगस्त 2013: जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग़ अभियुक्त को दोषी माना और तीन साल के लिए बाल सुधार गृह भेजा.
13 सितंबर 2013: ट्रायल कोर्ट ने चार बालिग़ अभियुक्तों को दोषी क़रार देते हुए फांसी की सज़ा सुनाई.
13 मार्च 2014: दिल्ली हाई कोर्ट ने फांसी की सज़ा को बरक़रार रखा.
मार्च-जून 2014: अभियुक्तों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की और सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला आने तक फांसी पर रोक लगा दी.
मई 2017: सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट और ट्रायल कोर्ट की फांसी की सज़ा को बरक़रार रखा.
जुलाई 2018: सुप्रीम कोर्ट ने तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका को ख़ारिज किया.
6 दिसंबर 2019: केंद्र सरकार ने एक दोषी की दया याचिका राष्ट्रपति के पास भेजी और नामंज़ूर करने की सिफ़ारिश की.
12 दिसंबर 2019: तिहाड़ जेल प्रशासन ने उत्तर प्रदेश जेल प्रशासन को जल्लाद मुहैया कराने के लिए अनुरोध किया.
13 दिसंबर 2019 : निर्भया की मां की ओर से पटियाला हाउस कोर्ट में फांसी की तारीख़ तय करने को लेकर एक याचिका दायर की गई थी. जिसमें चारों दोषी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हुए.
इन दोनों पर साल 2012 की 16 दिसंबर को एक चलती बस में एक युवती के साथ बलात्कार करने का आरोप है.
मामले पर सुनवाई चेंबर के भीतर हुई थी. जिसके बाद जस्टिस एन वी रमन्ना ने नेतृत्व वाली पांच जजों की बेंच ने विनय कुमार शर्मा और मुकेश सिंह की क्यूरेटिव पिटिशन को ख़ारिज कर दिया.
लाइव लॉ के मुताबिक, पांच जजों की बेंच में जस्टिस एन वी रमन्ना के अलावा जस्टिस अरुण मिश्रा, आर.एफ. नरीमन, आर बानुमती और अशोक भूषण भी थे.
इसके बाद निर्भया की मां आशा देवी ने कहा है, "सात साल से वो न्याय के लिए संघर्ष कर रही थीं. उनके लिए फांसी का दिन 22 जनवरी बड़ा दिन होगा."
निर्भया गैंगरेप मामले के चारों दोषियों के ख़िलाफ़ दिल्ली की एक कोर्ट ने सात जनवरी 2020 को डेथ वॉरन्ट जारी किया था. इसके बाद पटियाला हाउस कोर्ट ने फांसी के लिए 22 जनवरी, 2020 की तारीख़ सुबह सात बजे का समय तय किया है.
लेकिन फ़ैसले के बाद ही दोषी विनय के वकील एपी सिंह ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वे क्यूरेटिव पिटिशन दायर करेंगे.
विनय कुमार ने सबसे पहले आठ जनवरी 2020 को क्यूरेटिव पिटिशन दायर की. हालांकि बाद में दोषी क़रार दिए गए चार में से एक मुकेश ने भी क्यूरेटिव पिटिशन दाख़िल कर दी थी.
16 दिसंबर 2012: 23 वर्षीय फ़िज़ियोथेरेपी छात्रा के साथ चलती बस में छह लोगों ने गैंगरेप किया. छात्रा के पुरुष मित्र को बुरी तरह पीटा गया और दोनों को सड़क किनारे फेंक दिया गया.
17 दिसंबर 2012: मुख्य अभियुक्त और बस ड्राइवर राम सिंह को गिरफ़्तार कर लिया गया. अगले कुछ दिनों में उनके भाई मुकेश सिंह, जिम इंस्ट्रक्टर विनय शर्मा, फल बेचने वाले पवन गुप्ता, बस के हेल्पर अक्षय कुमार सिंह और एक 17 वर्षीय नाबालिग़ को गिरफ़्तार किया गया.
29 दिसंबर 2012: सिंगापुर के एक अस्पताल में पीड़िता की मौत. शव को वापस दिल्ली लाया गया.
11 मार्च 2013: अभियुक्त राम सिंह की तिहाड़ जेल में संदिग्ध हालत में मौत. पुलिस का कहना है कि उसने आत्महत्या की, लेकिन बचाव पक्ष के वकील और परिजनों ने हत्या के आरोप लगाए थे.
31 अगस्त 2013: जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग़ अभियुक्त को दोषी माना और तीन साल के लिए बाल सुधार गृह भेजा.
13 सितंबर 2013: ट्रायल कोर्ट ने चार बालिग़ अभियुक्तों को दोषी क़रार देते हुए फांसी की सज़ा सुनाई.
13 मार्च 2014: दिल्ली हाई कोर्ट ने फांसी की सज़ा को बरक़रार रखा.
मार्च-जून 2014: अभियुक्तों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की और सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला आने तक फांसी पर रोक लगा दी.
मई 2017: सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट और ट्रायल कोर्ट की फांसी की सज़ा को बरक़रार रखा.
जुलाई 2018: सुप्रीम कोर्ट ने तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका को ख़ारिज किया.
6 दिसंबर 2019: केंद्र सरकार ने एक दोषी की दया याचिका राष्ट्रपति के पास भेजी और नामंज़ूर करने की सिफ़ारिश की.
12 दिसंबर 2019: तिहाड़ जेल प्रशासन ने उत्तर प्रदेश जेल प्रशासन को जल्लाद मुहैया कराने के लिए अनुरोध किया.
13 दिसंबर 2019 : निर्भया की मां की ओर से पटियाला हाउस कोर्ट में फांसी की तारीख़ तय करने को लेकर एक याचिका दायर की गई थी. जिसमें चारों दोषी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हुए.
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